🌸🌸बचपन.... एक अदभुत अहसास होता है।माँ और पिताजी बताया करते - तुम, क्या - क्या कलाकारी करती ।सब कुछ ...कहानी की तरह..... ,सामने घटित होने लगता ।चेहरे के हाव- भाव... माँ की बातों ... के साथ, बदलने लगते । मन इस प्यारे एहसास से .....भावविभोर ......हो जाता, कि, ऐ !बचपन... तू , कितना कोमल था....।
यूं ही समय बीतता जाता है ,और सब जीवन के अगले पड़ाव में..... नए अहसासों को,के संजोना शुरू कर देते हैं.......।🌸🌸
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